ऑटो वाले के बेटे है मोहमद सिराज, अब है करोड़ो की संपति के मालिक,गेंदबाज नहीं ये बनना चाहते थे सिराज

दुनिया में बहुत सारे ऐसे नाम हुए हैं, जो लगन, मेहनत और अथक प्रयास के जरिए एक तारे के समान चमक रहे हैं। अब इन्हीं नामों में भारतीय क्रिकेट टीम के उबरते हुए तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज का नाम भी जुड़ चुका हैं।

अपने घातक गेंदबाजी के जरिए वह विरोधी टीम के बल्लेबाजों के पसीना छुडा देते हैं। आज वह भारतीय टेस्ट टीम के अहम खिलाड़ी बन गए हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद वह इंग्लैंड दौरे पर भी अपनी गेंदबाजी से शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

पर क्या आप जानते है, team india में जगह बनाने के लिए सिराज ने कितना संघर्ष किया है? गेंदबाजी में निखार लाने के लिए कितनी मेहनत की है? आज हम मोहम्मद सिराज की टीम इंडिया तक के सफर की बात करेंगे।

उस समय मोहम्मद सिराज के घर की हालात उतनी अच्छी नहीं थीं। उनके पिता ऑटो ड्राइवर थे। हैदराबाद शहर में ऑटो रिक्शा चला कर वह अपना घर चलाते थे। जिस कारण उनके घर की आर्थिक स्थिति भी बहुत ज्यादा कमजोर रहती थी। और पैसों के तंगी के कारण सिराज के परिवार को लंबे समय तक हैदराबाद के बंजारा हिल्स इलाके के एक छोटे से किराए के मकान के अंदर रहना पड़ा। सिराज ने अपना पूरा बचपन इसी घर में ही रहकर बिताया था।

सिराज के बड़े भाई पढ़ाई में अव्वल थे। और सिराज की मां चाहती थीं कि, सिराज भी अपने बड़े भाई की तरह पढाई में ध्यान लगाएं और इंजीनियर बने। पर सिराज बचपन से ही पढ़ाई से ज्यादा खेल में रुचि रखते थे।

और अक्सर वो अपनी स्कूल की क्लासेस को बंक करके क्रिकेट खेला करते थे। पर खेल के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए सिराज के पिता हमेशा उनका सपोर्ट करते थे। उनका सपना था कि, बेटा एक दिन जरूर क्रिकेटर बनेगा।

टेनिस बॉल से की क्रिकेट की शुरुआत

खेल में सिराज के पिता उनको सपोर्ट तो करते थे, पर परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण वह उन्हें अच्छी सुविधाएं नहीं दे पाते थे। लेकिन सिराज अपने घर की हालातों से अच्छी तरह वाकिफ थे, जिस कारण वह कभी भी अच्छी और महंगी चीजों की मांग नहीं करते हैं।

यहां तक कि मोहम्मद सिराज ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत भी किसी कोच से ट्रेनिंग लेकर या किसी बड़े क्रिकेट एकेडमी के साथ जुड़ कर नहीं बल्कि टेनिस बॉल क्रिकेट से की थी। वह रणजी ट्रॉफी में क्रिकेट करियर शुरू करने से कुछ साल पहले तक भी टेनिस बॉल क्रिकेट है खेलते थे।

बचपन से ही सिराज ने ठान लिया था कि, वह जरूर क्रिकेटर बनेगा। इसलिए वह सिर्फ 12वीं क्लास तक की ही पढ़ाई कर पाए।

सिराज ने अपनी पढ़ाई हैदराबाद के Safa Junior School से की थी। और उस समय अक्सर वो अपनी स्कूल की क्लासेस को बंक करके क्रिकेट खेला करते थे।

गेंदबाज नहीं बल्लेबाज बनना चाहते थे सिराज

शुरुआत में जब सिराज क्रिकेटर बनने की चाह रख कर प्रेक्टिस किया करते थे, तब वह गेंदबाजी नहीं बल्कि बल्लेबाजी करना पसंद करते थे। लेकिन एक दिन जब वो अपने कुछ दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे, तब उनके एक दोस्त ने सलाह दी कि उन्हें बल्लेबाजी छोड़कर गेंदबाजी पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि बल्लेबाजी से कई गुना बेहतर उनकी गेंदबाजी थी।

सिराज ने अपने दोस्त की यह बात मान ली। और उस दिन से सिराज ने अपना पूरा ध्यान गेंदबाजी पर लगाया। आज वह अपने शानदार गेंदबाजी से नए-नए कारनामे कर रहे हैं।


एक समय ऐसा था कि, सिराज के पास नया लेदर बॉल खरीदने के भी पैसे नहीं होते थे।

ऐसी स्थिति में उन्होंने हार नहीं मानी और सस्ती टेनिस बॉल से ही प्रेक्टिस करते थे। टेनिस बॉल से ही क्यूँ ना पर सिराज अपनी प्रेक्टिस में जी जान लगा देते थे। जिसका नतीजा आज हर क्रिकेट प्रेमी के आखों के सामने हैं।

पैसे न होने के कारण वह किसी भी क्रिकेट एकडेमी को जॉइन नहीं कर सकते थे और ना ही किसी अच्छे कोच से गेंदबाजी के गुण सीख सकते थे। पर क्रिकेटर बनने के जुनून, उम्मीद और कड़ी मेहनत ने सिराज का हर सपना पूरा करने में मदद की।