हरियाण की पुरानी रोडवेज बसों की सर्दियों से दिल्ली मे होगी एंट्री बैन,केवल BS-6 बसों को ही होगी अनुमति

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परिवहन विभाग बीएस-6 बसें ही राष्ट्रीय राजधानी भेजेगा। दिल्ली सरकार के आपत्ति जताने के बाद निर्णय लिया गया है। दिल्ली सरकार ने बीते दिनों हरियाणा सहित अन्य राज्यों को

सर्दियों के दौरान पुरानी डीजल बसें दिल्ली न भेजने के लिए पत्र लिखा था।हरियाणा रोडवेज की पुरानी बसें सर्दियों में दिल्ली नहीं जाएंगी।

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बीएस-4 मानक की बसें प्रदूषण फैलाने की श्रेणी में आ चुकी हैं। इसे देखते हुए परिवहन विभाग बीएस-6 बसें ही राष्ट्रीय राजधानी में भेजेगा।

दिल्ली सरकार के आपत्ति जताने के बाद यह निर्णय लिया गया है।परिवहन मंत्री मूल चंद शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। दिल्ली सरकार ने बीते दिनों हरियाणा सहित अन्य राज्यों को सर्दियों

के दौरान पुरानी डीजल बसें दिल्ली न भेजने के लिए पत्र लिखा था। उस पर विचार करते हुए सरकार पुरानी डीजल बसों को प्रदेश में ही चलाएगी।

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रोडवेज बेड़े में 2000 से अधिक बसें बीएस-4 मानक की हैं, इनमें से अधिकांश अपनी बुक वैल्यू पूरी कर चुकी हैं।बीएस-6 मानक की 700 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चल रही हैं।

परिवहन विभाग के पास अपनी 26 बसें ही इन मानक की हैं। अक्तूबर अंत तक इनकी संख्या बढ़कर 70 से ऊपर होने की उम्मीद है।

सर्दियों में दिल्ली में स्मॉग बढ़ने पर ये नई बसें ही चंडीगढ़ और प्रदेश के विभिन्न शहरों से सेवाएं देंगी।वर्तमान में रोडवेज के 24 डिपो, 13 सब डिपो से रोजाना दिल्ली लगभग 900 बसें

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आवागमन करती हैं, इनमें 300 के करीब बसें रात्रि सेवा की हैं। परिवहन मंत्री का कहना है कि नई बसें बनाने का काम तेजी से चल रहा है।

दिल्ली के रूट पर आने वाले महीनों में नई बसें ही भेजेंगे। नई बसों में 52 की जगह 56 सीटें हैं। पुरानी बसों की सेवाएं राज्य के भीतर ही लेंगे।

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809 नई बीएस-6 बसें बनाने पर चल रहा काम
हरियाणा रोडवेज इंजीनियरिंग कारपोरेशन में 809 नई बीएस-6 बसें बनाने का काम चल रहा है। 105 टाटा और 124 लेलैंड कंपनी की चेसिज आ चुकी हैं,

जिनमें से 21 लेलैंड और 5 टाटा बसें डिपो को भेज दी गई हैं। टाटा की एक बस पंचकूला, 4 अंबाला, लेलैंड की 4 बसें भिवानी, 6-6 चरखी दादरी और गुरुग्राम, 5 रोहतक डिपो को मिली हैं।