दिल्ली मेट्रो: पिंक और मैजेंटा लाइन पर 39 ट्रेनें उतरेगा डीएमआरसी

मेट्रो फेज चार में पिंक (मजलिस पार्क से शिव विहार) और मैजेंटा लाइन (बॉटेनिकल गार्डन से जनकपुरी पश्चिम) के विस्तार के बाद ट्रेन के फ्रीक्वेंसी पर कोई असर न पड़े इसके लिए दोनों लाइन पर 39 मेट्रो ट्रेन सेट उतारेगी। छह कोच वाली इस ट्रेन सेट को तैयार करने के लिए दोनों कॉरीडोर के लिए 234 मेट्रो कोच ला रही है। कोच आपूर्ति के लिए जारी निविदा के लिए पांच कंपनियां आगे आई हैं, जिसमें एक रूस की कंपनी भी शामिल है। कंपनियों के चयन की प्रक्रिया जारी है। बताया जा रहा है कि कंपनियों के पास कोच आपूर्ति के साथ 15 वर्षों तक रखरखाव की भी जिम्मेदारी होगी।

पिंक लाइन की 58 किलोमीटर की लाइन का मेट्रो फेज चार में विस्तार किया जा रहा है। यह विस्तार मुंकुंदपुर से मौजपुर के बीच 12.58 किलोमीटर लंबा है। इसके बाद पिंक लाइन रिंग मेट्रो लाइन के नाम से भी जाना जाएगा, क्योंकि विस्तार का काम पूरा होने के बाद यह कॉरीडोर रिंग लाइन की तरह होगा। यह पूरी दिल्ली को आपस में जोड़ेगा। पिंक लाइन के विस्तार के बाद मेट्रो की फ्रीक्वेंसी पर असर न पड़े, इसलिए 90 कोच यानी छह कोच वाली 15 मेट्रो ट्रेन सेट उतारी जाएगी। अभी पिंक लाइन पर तीन से पांच मिनट के अंतराल पर मेट्रो चलती है। पीक आवर्स में बेहतर फ्रीक्वेंसी के लिए लूप परिचालन भी किया जाता है।

इसी तरह मैजेंटा लाइन 38 किलोमीटर लंबी है। इसका विस्तार जनकपुरी पश्चिमी से आरके आश्रम के बीच 28.92 किलोमीटर हो रहा है। उसके लिए कुल 144 कोच यानी छह कोच वाली 24 ट्रेन सेट उतारेगी जिससे यात्रियों को पुरानी लाइन और विस्तार होने के बाद नई लाइन पर एक ही अंतराल पर मेट्रो मिलती रहे। इस लाइन पर अभी तीन से पांच मिनट के अंतराल पर ट्रेन मिलती है। यह कॉरीडोर एयरपोर्ट को भी मेट्रो से जोड़ती है। नोएडा से दक्षिणी दिल्ली की सीधे कनेक्ट करने का काम करती है।

मांग के अनुसार तय होती है फ्रीक्वेंसी

मेट्रो के मुताबिक पिंक और मैजेंटा लाइन पर जो सिग्नलिंग सिस्टम है उसमें मांग होने पर 90 सेकेंड के अंतराल पर भी मेट्रो चलाई जा सकती है, मगर मेट्रो की फ्रीक्वेंसी उस लाइन पर यात्रियों की मांग के अनुसार तय होती है। अभी जो यात्री हैं उसके लिहाज से पीक आवर्स में अधिकतम तीन मिनट के अंतराल पर और नान पीक आवर्स में पांच मिनट के अंतराल पर इसका संचालन होगा। भविष्य में विस्तार के बाद फ्रीक्वेंसी पर असर न पड़े, इसलिए नई ट्रेन लाई जा रही है। अगर यात्रियों की संख्या बढ़ी तो फ्रीक्वेंसी और बेहतर की जाएगी।

कोच आने में चार वर्ष से अधिक समय लगेगा

दिल्ली मेट्रो के मुताबिक मेट्रो कोच की आपूर्ति के लिए कंपनी का चयन होने के बाद ट्रेन को बनाने और डिलीवर करने करने का काम 4.5 साल में पूरा करना होगा। यही नहीं कंपनी को कोच की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी भी 15 साल तक निभानी होगी। यह सभी ट्रेन चालक रहित तकनीक पर आधारित होगी। यह 3.5 मीटर चौड़ी होगा। वर्तमान में पिंक और मजेंटा लाइन पर चालक रहित मेट्रो परिचालन वाली तकनीकी काम करती है। मजेंटा लाइन पर बिना चालक वाली मेट्रो चल रही है।