हिसार मे दृष्टिबाधित विद्यार्थी बिना कागज-कलम के अंधेरी दुनिया में भी करेंगे शिक्षा प्राप्त, इस डिवाइस से

हिसार। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला दृष्टिबाधित छात्र ऋषिकांत अब इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर ही पढ़ाई पूरी कर सकेगा। ऐसे बच्चों के लिए मशीन बनी है जिसका नाम है एनी। इस सेल्फ लर्निंग ब्रेल लिटरेसी डिवाइस मशीन के जरिये दृष्टिबाधित

विद्यार्थी बिना कागज-कलम के अपनी अंधेरी दुनिया में भी शिक्षा के पथ पर चल सकेंगे। सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे स्व मूल्यांकन के साथ-साथ अध्यापक भी ऑनलाइन पढ़ाई का जायजा ले सकते हैं।


दृष्टिबाधित की पढ़ाई ब्रेल लिपि के जरिये होती है। इस लिपि से ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कत आती है। कंप्यूटर पर जार्ज सॉफ्टवेयर के जरिये बोलकर टाइप तो कर लेते हैं, लेकिन उसका मूल्यांकन नहीं हो पाता है।

इन सब समस्याओं का समाधान निकाला है एनी मशीन ने। रेडियो जैसी इस मशीन में विषयवार व कक्षावार पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसे चलाने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी की एक आईडी बनेगी। विद्यार्थी अपनी इच्छानुसार मशीन पर लिख और पढ़ सकता है।

मशीन की विशेषता
एनी मशीन ऐसा इलेक्ट्रानिक डिवाइस है, जिसमें लिखने-पढ़ने के साथ-साथ स्व मूल्यांकन की भी सुविधा है। इसके लिए मशीन की ऊपरी सतह पर बटन लगे हैं, जिस पर ब्रेल लिपि

अंकित है। दृष्टिबाधित बच्चे इसके जरिये अपने सेमेस्टर की पढ़ाई-लिखाई के अलावा परीक्षा भी आसानी से दे सकते हैं। मशीन में लगे स्पीकर बोलकर बताते भी हैं।


अंध महाविद्यालय को मिलीं दो एनी मशीन
हिसार के रेडक्रास भवन परिसर में संचालित अंध महाविद्यालय के स्पेशल टीचर सुखबीर ने बताया कि महाविद्यालय को दो एनी मशीन मिली हैं। एक मशीन की कीमत लगभग 75 हजार

रुपये है। यहां 30 बच्चे नामांकित हैं। इस मशीन के जरिये अभी बच्चों को बारी-बारी से पढ़ाई का अवसर मिलेगा। इसके अलावा यहां सात कंप्यूटर भी हैं, जिस पर बच्चे जार्ज सॉफ्टवेयर के जरिये पढ़ाई कर रहे हैं।

स्वच्छता के लिए कर रहे जागरूक कुलदीप आजाद
इतिहास के प्रवक्ता कुलदीप आजाद बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। स्वच्छता के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाने पर वर्ष

2013 में इन्हें डिप्टी कमिश्नर अमित अग्रवाल ने सम्मानित किया था। इसके बाद वर्ष 2016 में स्वच्छ भारत अभियान में जागरूकता कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री ने भी सम्मानित किया। वे प्रदेश भर के दृष्टिबाधित दिव्यांगों की मदद के लिए भी प्रयास करते रहते हैं।


कमाल का तबला बजाते हैं एसडीओ विरेंद्र
हिसार शहर के विजय नगर निवासी और सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग में एसडीओ
विरेंद्र कुमार शर्मा दृष्टिबाधित हैं। इस वक्त चंडीगढ़ मुख्यालय के गायन एवं नाटक अनुभाग में तैनात हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत में डिप्लोमा करने वाले विरेंद्र बचपन से तबला बजाने के शौकीन हैं। पढ़ाई के दौरान विश्वविद्यालय के यूथ फेस्टिवल में वे प्रथम पुरस्कार जीत चुके हैं। वर्ष 1988 में नौकरी पाने के बाद से अब तक लगातार दिव्यांगों को प्रेरित कर रहे हैं।